Video; बचपन में आप ने पढ़ी प्यासे कौवा वाली कहानी, आज देख भी लीजिए वीडियो देख कर दंग रह जाएंगे

अपने बचपन में हर किसी ने प्यासे कौए (Crow) वाली कहानी जरूर सुनी या पढ़ी होगी. जिसमें एक प्यासा कौआ (thirsty crow) अपनी प्यास बुझाने के लिए एक घड़े (pot) के पास पहुंचता है जिसमें पानी काफी कम है और उसकी चौंच पानी तक नहीं पहुंच पाती. पानी पीने के लिए कौआ एक तरकीब निकालता है. जिसके लिए वह अपनी चोंंच से छोटे-छोटे पत्थर लेकर घटे में डालता है जिससे पानी ऊपर आ जाता है और कौआ पानी (Water) पीकर चला जाता है।

ये कहानी कितनी सच थी और कितनी बनावटी इस बात को कोई पता नहीं चला लेकिन छोटे बच्चों को सीख देने के लिए इससे अच्छा उदाहरण किसी को नहीं मिला. लेकिन अब ये कहानी हकीकत में तब्दील हो गई है।दरअसल, सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल (Viral Video) हो रहा है. जिसमें हकीकत में एक कौआ हमारे बचपन वाली कहानी को पूरा करता नजर आ रहा है. यानी कौआ उसी प्यासे कौए वाली कहानी को पूरा कर रहा है।

जिसमें एक कौआ अपनी चौंच में पत्थर के टुकड़े लेकर घड़े में डालता है. लेकिन वायरल हो रहे वीडियो में घड़े की जगह कौवा एक बोतल में पत्थर डालता नजर आ रहा है. इस वीडियो को जिसने भी देखा हैरान रह गया. सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को खूब पसंद कर रहे हैं. भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी परवीन कासवान ने इस वीडियो को अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक कौवा एक बोतल के पास बैठा हुआ है।

कौए को शायद प्यास लगी है. बोतल में पानी तो है लेकिन उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुंच पाती तो कोवा अपनी चोंच में एक पत्थर लेकर आता है बोतल में डाल देता है. जिससे पानी ऊपर आ जाता है और कोवा पानी पी लेता है. उसके बाद वह के बाद एक कई पत्थर लाकर बोतल में डालता है और अपनी प्यास बुझाता है. इस वीडियो को शेयर करते हुए परवीन कासवान ने कैप्शन दिया है, “इस कौए के पास भौतिक विज्ञान की डिग्री है।

15 नवंबर को शेयर किए गए इस वीडियो को अब तक चार लाख 62 हजार से ज्यादा बार देखा जा चुका है. परवीन कासवान ने ये भी बताया कि ये कौवा नहीं है बल्कि ये उनकी ही फैमिली का Black Billed Magpie है. इस वीडियो को देखने के बाद तमाम यूजर्स इस वीडियो पर कमेंट्स कर रहे हैं।

साथ ही उनके साथ घटी कौए की अपनी कहानी बता रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, सर मेरी दादी जब हमारी ढाणी में बिलोना करती थी , तो एक क़व्वा जान बुझ के आँगन के दूसरे कोने में हड्डी वग़ैरह बिखेरता था , जब दादी उसको साफ़ करने में लगती तो बाक़ी कोवे बिलोने में मुँह मार जाते।

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