आदिवासी विधवा महिला ने एसपी ऑफिस के सामने आत्मदाह करने की दी धमकी, भूमाफिया एवं पुलिस पर लगा आरोप, पढ़िए पूरी खबर

छत्तीसगढ़/उसलापुर-केंद्र से लेकर प्रदेश की सरकार और देश का कानून भले ही खुद के आदिवासी हितैषी होने का दावा करें, लेकिन हकीकत में एक आदिवासी परिवार के साथ जिस तरह की बदसलूकी हुई है ,उसके बाद पीड़ित महिला ने न्याय नहीं मिलने पर एसपी कार्यालय के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। महामाया मंदिर के पास उसलापुर सकरी में रहने वाली सिद्धिका मरकाम के पति गोविंद सिंह मरकाम का निधन हो चुका है ।उनके साथ उनका बेटा दीपक मरकाम और बेटी पूजा मरकाम रहते हैं। बताया जा रहा है कि उसलापुर फाटक के पास उनकी एक जमीन है, जिस पर उमेश मुरारका नाम के किसी व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है ।जब इसकी जानकारी सिद्धिका और दीपक मरकाम को हुई तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर ना सिर्फ चौकीदार को डांट लगाई बल्कि उनकी जमीन पर मौजूद बोर्ड को भी उखाड़ दिया। यह मामला सकरी थाने तक पहुंचा और सकरी थाना प्रभारी रविंद्र यादव द्वारा फैसला होने तक विवादित जमीन पर किसी तरह का कोई निर्माण दोनों पक्षों द्वारा नहीं करने की बात की गई।

बताया जा रहा है कि इसी बीच 11 सितंबर को मरकाम परिवार को सूचना मिली कि उनके इसी जमीन पर कोई व्यक्ति अवैध निर्माण करा रहा है। खबर पाकर मौके पर सिद्दीका मरकाम, दीपक और पूजा मरकाम पहुंचे तो वहां उन्हें अमित सिंह ठाकुर मिला। जिसने खुद को सतनामी बताया। जब अमित सिंह को बताया गया कि यह जमीन उनकी यानी कि एक आदिवासी की है, जिसे कोई गैर आदिवासी नहीं खरीद सकता तो फिर इस जमीन पर कैसे कोई निर्माण किया जा रहा है। विवाद के दौरान ही अमित सिंह ने मरकाम परिवार के साथ बदसलूकी की और ईट उठाकर उन्हें मारने भी दौड़ाया। इससे घबराकर पूजा मरकाम ने पहले तो 112 को कॉल किया, लेकिन उनके नहीं आने पर सिविल लाइन थाना प्रभारी रविंद्र यादव को भी फोन किया। उन्होंने बताया कि वे सिविल लाइन थाने में है । विवाद बढ़ता देख कर मरकाम परिवार भागा भागा सकरी थाना पहुंचा तो उन्होंने देखा कि न सिर्फ रविंद्र यादव थाने में मौजूद है बल्कि उनके साथ विवाद करने वाला अमित सिंह ठाकुर भी बैठा है। इस बीच इन दोनों के मध्य न जाने कैसा सांठगांठ हुआ कि रविंद्र यादव के सुर ही बदल गए। इस बदले हुए तेवर के साथ अब थानेदार रविंद्र यादव उल्टे मरकाम परिवार को ही धमकाने लगा। यहां तक कि किसी पुराने मामले में उन्हें गिरफ्तार करने की भी धमकी दी जाने लगी ।पूजा मरकाम के अनुसार सकरी थाने में न्याय नहीं मिलने के बाद जब उन्होंने अजाक थाने जाने की बात कही तो आपा खोकर रविंद्र यादव और अन्य पुलिस स्टाफ ने सिद्दीका मरकाम, पूजा मरकाम और दीपक मरकाम की थाने में ही पिटाई शुरू कर दी । बताया जा रहा है कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने भी मां और बेटी दोनों की पिटाई की।

मरकाम परिवार इसलिए भी हैरान रह गया क्योंकि कुछ दिन पहले ही रविंद्र यादव द्वारा उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया गया था कि उनकी जमीन पर किसी भी प्रकार का कार्य नहीं किया जाएगा ।रविंद्र यादव ने उनके साथ होने का भरोसा दिलाया था, लेकिन अमित सिंह के साथ हुई डील से ही रविंद्र यादव ने यू-टर्न ले लिया था जिनके द्वारा मरकाम परिवार को मारपीट कर थाने से भगा दिया गया। पीड़ित परिवार द्वारा 17 जून को उमेश मुरारका के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। उस पर कार्यवाही की बजाए मरकाम परिवार को ही परेशान करने सिद्धिका मरकाम और दीपक मरकाम के खिलाफ ही सकरी थाने में झूठी एफ आई आर दर्ज कर दी गई। हार्ट पेशेंट, विधवा ,आदिवासी महिला को प्रताड़ित कर उनकी जमीन हड़पने की साजिश की जा रही है, जिसमें बड़े-बड़े लोग शामिल है। मरकाम परिवार ने थाना प्रभारी रविन्द्र यादव पर उमेश मुरारका और अमित सिंह के साथ सांठगांठ कर उनकी जमीन हड़पने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। इस मामले में पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से लेकर अनुसूचित जनजाति आयोग, महिला थाना एसपी ,आई जी, सभी को शिकायत दर्ज कराई है लेकिन फिर भी उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा। पीड़ित परिवार साजिश रचने वाले थाना प्रभारी रविंद्र यादव के निलंबन के साथ इंसाफ की मांग कर रहा है।

मौजूदा हालात से परेशान होकर सिद्धिका मरकाम ने जल्द ही न्याय नहीं मिलने पर एसपी कार्यालय के सामने आत्मदाह करने की चेतावनी भी दी है। मरकाम परिवार की बात माने तो उनके इस परेशानी की जानकारी पुलिस से लेकर मंत्री तक को है लेकिन फिर भी कोई उनकी मदद को तैयार नहीं हो रहा। मरकाम परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन हड़पने के नाम पर उनके ही खिलाफ साजिश रची जा रही है, उन्हें झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है ताकि वे अपनी जमीन भू माफिया के लिए छोड़ दें और इस पूरी साजिश में पुलिस की भी मिलीभगत का आरोप लगाया जा रहा है। कहने को तो यहां कानून का राज चलता है लेकिन सच्चाई यह है कि यहां जंगलराज है, जिसकी लाठी , उसकी भैंस। किसी गरीब के पास अगर कोई जमीन है तो यह उसके लिए किसी आफत से कम नहीं है। अगर उसकी जमीन पर किसी भूमाफिया की नजर टेढ़ी हो गई तो फिर उस जमीन को बचाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। क्योंकि भू माफिया को वह जमीन दिलाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी अपनी ताकत झोंक देती है । इसी परेशानी से जूझ रहा मरकाम परिवार टूट चुका है। हैरानी इस बात की है कि जो सरकार खुद को आदिवासी हितेषी बताती है, उनके राज में ऐसा हो रहा है। हम यह दावा नहीं करते कि जमीन किसकी है ।लेकिन अगर मरकाम परिवार के आरोप सही है तो कम से कम इस मामले की निष्पक्ष जांच तो होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और अगर इस मामले में पुलिस और भूमाफिया दोषी पाए गए तो उन्हें उनके किए की पूरी सजा भी मिलनी चाहिए।

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