इस शख्स ने 15 साल से नही किया स्नान, 20 सालों तक कमरे में कैद, घर से मिला ऐसा चीज की लोग हैरान हो गए

कहते हैं कि दौलत से इंसान कुछ भी खरीद सकता है। लेकिन कई  बार दौलत इतनी बेमकसद हो जाती है कि उसका होना न होना बराबर होता है और इंसान की जिंदगी दोजख हो जाती है। गुजरात के राजकोट में एक ऐसा मामला सामने आया है। एक गैर सरकार संगठन ने राजकोट के एक घर में एक कमरे में कैद ऐसी महिला को बाहर निकाला है जो 20 साल से वहीं बंद थी। 20  साल से एक कमरे में कैद करने के कारण महिला के बाल 8 फीट लंबे हो गए थे। नग्न हालत में घर में बंद इस महिला की उम्र 65 साल है, यानी जब वो 45 साल की  थी तब उसने खुद को कमरे में कैद कर लिया था। अब इस औरत की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। 

अब इस महिला की कहानी सुनिए, यकीनन आप कह उठेंगे कि किस्मत से बड़ा कुछ नहीं। राजकोट के धरोल में एक तीन मंजिला मकान के एक कमरे में पिछले 20  सालों से बंद कंचनबेन पिपलिया किसी से बात नहीं करती थी। 20 साल पहले किसी वजह से आस पास के उनके समाज के लोगों ने उनसे दूरी बना ली थी। तब कंचन ने खुद को कमरे में कैद कर लिया। उस वक्त उनके पास तीन तीन घर थे और करीब 60 तोला सोना भी था। लेकिन समाज के बहिष्कार के चलते वो इतनी गमगीन हो गई कि खुद को कमरे में बंद कर लिया। तब उनके परिवार के लोग केवल उनको भोजन देने कमरे के बाहर आते थे। धीरे धीरे परिवार वाले भी वहां से चले गए और पड़ोसी केवल कमरे के बाहर खाना रखकर चले जाते थे। 

बताया गया है कि कंचनबेन की शादी नहीं हुई थी, लेकिन वो अच्छे खासे घर से संबंध रखती थी। सामाजिक बेरुखी के चलते वो छोटे से कमरे में कैद हुई तो पूरे बीस साल बाद उनको निकाला जा सका। एक ही कमरे में एक ही पोजिशन में वो हमेशा बैठी रहती थी, इस वजह से उनके पैर भी मुड़ गए थे। बंद कमरे में काफी गंदगी और कूड़ा निकला। जब कंचनबेन को कमरे से निकाला गया तो वो नग्न अवस्था में थी और उनके पास गर्म कपड़े भी नहीं थे। 

आस पास के लोगों ने संगठन को उनके परिवार का पता दिया लेकिन परिवार के लोगों ने कंचनबेन को पहचानने से ही इनकार कर दिया है। हालांकि एक गैर सरकारी मानवतावादी संगठन ने कंचनबेन को सूरत के मानव मंदिर आश्रम भेजा है जहां उनकी देखभाल की जाएगी। 

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