रानी को लगता ढाई प्याले शराब का भोग,होती है भक्तों की मनोकामना पूरी..

नागौर जिले के ऐतिहासिक भंवाल माता मंदिर में इन दिनों हर वक़्त भक्तों का भारी जमावड़ा लगा है. लोग दूर दूर से माता के दरबार में मन्नत मांगने आते हैं लेकिन इस बार कोविड 19 की वजह से भक्तों में थोड़ा सा डर है लेकिन आस्था है कि श्रद्धालुओं को यहां खींच कर ले आती है. नवरात्र के दिनों में मन्दिर मे मेले सा माहौल नजर आता है.

भारत के साथ-साथ विदेश से आये सैलानियों में भी मशहूर काली माता के इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता को भक्तों द्वारा शराब का भोग लगाया जाना है. माता एक भक्त से ढाई प्याला शराब का भोग लगाती है. खास बात ये है कि माता उसी भक्त की शराब का भोग लगाती है जिसकी मनोकामना या मन्नत पूरी होनी होती है. नवरात्रा में लोग विशेष तौर पर इस मंदिर में आते हैं.

मंदिर निर्माण को 800 से ज्यादा साल हो चुके
राजस्थान के नागौर जिले की मेड़ता तहसील के भंवाल गांव में काली माता का मंदिर है जिसके निर्माण को 800 से ज्यादा साल हो चुके हैं. बाकि सब जगहों से हटकर भंवाल गांव के कालीमाता मंदिर की खास बात ये है कि यहां पर काली माता को भक्त प्रसाद के रूप में शराब का भोग लगाते हैं. खास बात यह है कि माता भी सभी भक्तों की शराब स्वीकार नहीं करती. केवल उसी भक्त की शराब कबूल की जाती है जिसकी मन्नत पूरी की जानी होती है. नवरात्र के मौके पर भक्त विशेष तौर पर अपनी फरियाद लेकर माता के दरबार मे आते हैं और भारी तादाद में इन दिनों माता के भक्त मंदिर में देखे जा रहे हैं.

बह्माणी माता को चढ़ता है मीठा प्रसाद
मंदिर में दो माता की मूर्तियां हैं पहली बह्माणी माता जिन्हे मीठा प्रसाद चढ़ाते हैं दूसरी काली माता की जिनको शराब चढ़ाई जाती हैं. हजारों भक्त भंवाल में अपनी मुरादें लेकर आते हैं. ऐसा नहीं है कि भक्त सिर्फ मन्नत मांगने के लिए ही माता के दरबार में आते हैं बल्कि जिन भक्तों की मुराद पूरी हो जाती है वे भी फिर से माता का शुकराना अदा करने भंवाल आते हैं. अगर माता को भक्त की शराब मंजूर हो तो शराब का प्याला खाली हो जाता है: 

मंदिर में भक्तों को इस बात का भी खास ध्यान रखना होता है कि वो चमड़े से बनी कोई चीज इस वक्त ना पहना हो जब इसकी शराब को भोग लगाया जा रहा हो. अगर भक्त चमड़े से बनी कोई चीज पहने होता है तो माता उसकी भेंट स्वीकार नहीं करती. पूजारी जब शराब का प्याला माता को चढ़ाता है तो अगर माता को भक्त की शराब मंजूर हो तो शराब का प्याला खाली हो जाता है इस तरह करके माता ढाई प्याला शराब ग्रहण करती है. 

भारत आस्था प्रधान देश
भारत आस्था प्रधान देश है यहां आस्था पहले होती है और विज्ञान बाद में, भंवाल माता के प्रति भक्तों की आस्था भी कुछ ऐसी ही है. जिस शराब को आमतौर पर समाज में अच्छा नहीं माना जाता वहीं शराब यहां पवित्र मानी जाती है और हर उम्र के भक्तों के हाथ मे देखी जा सकती है.

Leave A Reply

Your email address will not be published.