अगर बैंक लाकर में आप भी अपनी कीमती सामान रखे है तो हो जाइए सावधान, गायब हुआ करोड़ो का गोल्ड

अगर आपका बैंक में लॉकर है या लेने की सोच रहे हैं, तो एक बार वहां पर रखी वस्तुओं की सुरक्षा के बारे में जरूर जान लें। लॉकर में रखी वस्तुओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक की नहीं है। माना जाता है कि बैंक के लॉकर में जो भी रखा है, उसकी जानकारी केवल आपको ही है। ऐसे में बैंक लॉकर में होने वाले नुकसान की भरपाई भी नहीं करता है। हाल ही में एक ऐसा ही केस आया है। यहां पर लॉकर से करोड़ों रुपये का सोना गायब हो गया है, लेकिन बैंक वाले जिम्मेदारी लेने से इनकार कर रहे हैं। लॉकर के मालिक ने अब आखिरकार परेशान होकर पुलिस में रिपोर्ट लिखाई है। लॉकर मालिक के अनुसार बैंक की लापरवाही से उसे नुकसान हुआ है, लेकिन अभी तक इस मामले का कोई हल नहीं निकला है।

लखनऊ में चौक स्थिति खुन खुन जी रोड वाली बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा से जुड़ा हुआ है। बैंक ऑफ बड़ौदा की इस शाखा के लॉकर से करोड़ों रुपये के सोने के गहने चोरी चले गए हैं। लोगों का आरोप है कि इसमें बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत भी है। इस घटना से पीड़ित व्यक्ति सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने चौक कोतवाली में बैंक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है।

लखनऊ के सराय माली खान चौक निवासी अमित प्रकाश बहादुर सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। इस वक्त यह बेंगलुरु में रहते हैं। अमित प्रकाश के अनुसार चौक स्थिति खुन खुन जी रोड वाली बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में उनका व पिता डॉ रविंद्र बहादुर और मां पुष्पा बहादुर का संयुक्त नाम से बैंक खाता है। 30 अक्टूबर को डॉ रविंद्र पत्नी पुष्पा के साथ बैंक में लॉकर में कुछ रखने गए थे। यह दंपति लॉकर इंचार्ज स्वाति के साथ लॉकर रूम पहुंचा। अमित का कहना है कि स्वाति ने लॉकर में चाबी लगा कर उसे खोलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुईं। स्वाति ने जब चाबी बाहर निकाली तो लॉकर का दरवाजा अपने आप खुल गया। वहीं देखा गया तो इस लॉकर में रखे सोने के सिक्के व जेवरात गायब थे। अमित के अनुसार कुल जेवरात का वजन करीब दो किलोग्राम था, जो गायब है।

बैंक से पीड़ित व्यक्ति का आरोप है कि बैंक प्रबंधन का रवैया संदिग्ध है। वह न तो उनकी बात का सही जवाब दे रहे हैं, न ही उनको कुछ बता रहे हैं। 23 अक्टूबर को घटना के बाद ही बैंक प्रबंधन को मामले की लिखित शिकायत दी गई थी। लेकिन उन लोगों ने कुछ नहीं किया और 26 अक्टूबर को आने का कहा। जब परेशान लोग फिर बैंक पहुंचे थे तो बैंक प्रबंधन ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद परेशान लोगों ने चौक कोतवाली में मामले की लिखित शिकायत कर दी। लेकिन पुलिस ने भी मनमानी की और 8 नवंबर को यह एफआईआर दर्ज हुई। अमित ने बैंक प्रबंधन, उसके कर्मचारियों तथा लॉकर इंचार्ज स्वाति पर जेवर हड़पने का आरोप लगाया है।

साल 2017 में आरबीआई की तरफ से जारी गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों की ये कतई जिम्मेदारी नहीं बनती की किसी दुर्घटना होने पर वो लॉकर में रखी कीमती चीजों की भरपाई ग्राहक को करें। यानी अगर किसी भी प्रकार की अनहोनी बैंक में होती है जैसे बैंक में डकैती, आग लगना या किसी तरह के प्राकृतिक आपदा होने पर बैंक अपने ग्राहक को भरपाई नहीं करेगा। बैंक के लॉकर एग्रीमेंट में देयता भुगतान के बारे में कोई उल्‍लेख नहीं होता है। इसलिए सारी जिम्मेदारी लॉकर लेने वाले ग्राहक की ही होती है, और ऐसी स्थितियों के लिए अपने कीमती सामान का बीमा कराना चाहिए।

आप अपने होम इंश्योरेंस के जरिये भी गोल्ड बीमा कवर का लाभ ले सकते हैं। ये आपके किसी भी अन्य हाउसहोल्ड सामानों में शामिल किया जा सकता है। अगर आपके गहनों की चोरी हो गई है, लूट या फिर किसी दुर्घटना से नुकसान हुआ है, तो गोल्ड इंश्योरेंस से आपके नुकसान की भरपाई हो जाएगी। बैंक लॉकर में रखे गोल्ड के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितनी राशि के सोने का इंश्योरेंस कराया है।

बैंक लॉकर में रखे सामान का बीमा नहीं देते हैं। हालांकि कुछ निजी बीमा कंपनियां भारत में गोल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी बेच रही हैं। इसमें टाटा एआईजी, इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई लोंबार्ड और फ्यूचर जनराली जैसी इंश्योरेंस कंपनियां शामिल हैं। इनमें से कुछ इंश्योरेंस कपंनियों ने हाल ही में बैंक लॉकर प्रोटेक्‍शन पॉलिसी की भी शुरुआत की है। बैंक लॉकर प्रोटेक्‍शन के जरिये ग्राहकों को बैंक में आग लगने पर, चोरी होने पर, प्राकृतिक आपदा, आतंकवादी हमला या फिर किसी भी तरह के बैंक कर्मचारी द्वारा धोखा मिलने पर गोल्ड की सुरक्षा प्रदान की जाती है। इस गोल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी के माध्याम से 2 लाख रुपये से लेकर 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर लिया जा सकता है।

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